साधक साधना में उपयोग की सामग्री (नैवेद्य, भोग) तथा अपना भोजन स्वयं तैयार करें। उस पात्र का जल २४ घण्टे बाद किसी वृक्ष पर चढ़ा दें। ऊँ ह्रीं श्रीं चामुण्डा सिंहवाहिनी बीसहस्ती भगवती रत्नमण्डित सोनन की माल । साधना के समय जल का लोटा अपने पास रखें। हालांकि इसके लिए https://karll777kao6.blgwiki.com/user